Bahut gurur hai tumhe apne dimag ke soch par
Kabhi tod ke dekho dararon ki khubsoorati

बहुत गूरूर है तुम्हें अपने दिमाग़ के सोच पर
कभी तोड़ के देखो, दरारों की ख़ूबसूरती
रोशनी से बिखरती हुए रेखाओं की मर्यादा
सुकून दिलायेगा हर उथल पूथल के बीच

 

Namrata

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